अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 31 मार्च, 2026 को 8-1 के फैसले से एक ऐतिहासिक निर्णय दिया, जिसमें कहा गया कि कोलोराडो कानून, जो LGBTQ+ नाबालिगों के लिए "कन्वर्जन थेरेपी" पर प्रतिबंध लगाता है, अभिव्यक्ति के दृष्टिकोण-आधारित नियमन का गठन करता है और इस प्रकार अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन का उल्लंघन करता है। (स्रोत: NPR, एसोसिएटेड प्रेस, SCOTUSblog)

यह मामला डेनवर के एक ईसाई परामर्शदाता और कोलोराडो के अटॉर्नी जनरल के बीच था। शिकायतकर्ता ने तर्क दिया कि कानून उसे अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौखिक परामर्श के अपने पेशे का अभ्यास करने से रोकता है। अदालत के बहुमत ने माना कि प्रतिबंध ने चिकित्सा अभ्यास के बजाय भाषण की सामग्री को विनियमित किया। (स्रोत: SCOTUSblog, STAT News)

कोलोराडो संयुक्त राज्य अमेरिका के 24 राज्यों और कोलंबिया जिले में से एक है जो नाबालिगों पर कन्वर्जन थेरेपी के विवादास्पद अभ्यास पर प्रतिबंध लगाता है। यौन अभिविन्यास या लिंग पहचान को बदलने के उद्देश्य से इन प्रथाओं को अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन और अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन सहित सभी प्रमुख अमेरिकी चिकित्सा संगठनों द्वारा "अप्रामाणिक" बताया गया है। (स्रोत: एंकोरेज डेली न्यूज, सीटीवी न्यूज)

यह निर्णय देश भर में इसी तरह के कानूनों को चुनौती देते हुए व्यापक प्रभाव डाल सकता है। LGBTQ+ अधिकार संगठनों ने इस निर्णय की कड़ी निंदा की है, जबकि रूढ़िवादी धार्मिक समूहों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए एक जीत के रूप में सराहा है। (स्रोत: NPR, AP)

9 न्यायाधीशों में से एकमात्र असहमतिपूर्ण आवाज को प्रारंभिक रिपोर्टों में तुरंत पहचाना नहीं गया था। यह लगभग सर्वसम्मत (8-1) निर्णय इस निर्णय की संवैधानिक पहुंच को रेखांकित करता है, जो अमेरिकी कानूनी प्रणाली में नाबालिगों के संरक्षण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच मौलिक संघर्ष को छूता है। (स्रोत: STAT News, SCOTUSblog)